Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.14.13: जो कायर और नपुंसक है, वह पृथ्वी का भोग नहीं कर सकता। वह न तो धन कमा सकता है, न उसका उपभोग कर सकता है। जैसे कीचड़ में मछलियाँ नहीं रहतीं, वैसे ही नपुंसक के घर में पुत्र नहीं रहते।॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.14: द्रौपदीका युधिष्ठिरको राजदण्डधारणपूर्वक पृथ्वीका शासन करनेके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न क्लीबो वसुधां भुङ्क्ते न क्लीबो धनमश्नुते।
न क्लीबस्य गृहे पुत्रा मत्स्या: पंक इवासते॥ १३॥
अनुवाद
जो कायर और नपुंसक है, वह पृथ्वी का भोग नहीं कर सकता। वह न तो धन कमा सकता है, न उसका उपभोग कर सकता है। जैसे कीचड़ में मछलियाँ नहीं रहतीं, वैसे ही नपुंसक के घर में पुत्र नहीं रहते।॥13॥
He who is cowardly and impotent cannot enjoy the earth. He can neither earn wealth nor enjoy it. Just as there are no fishes in the mud, similarly there are no sons in the house of an impotent person.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥