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mahabharat 12.139.99: जो राजा धर्म को नहीं जानता, उसके अत्याचारों के कारण उसकी प्रजा नष्ट हो जाती है। राजा ही धर्म, अर्थ और काम का मूल है। इसलिए उसे बहुत सावधान रहना चाहिए और अपनी प्रजा का सदैव ध्यान रखना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.99 
अधर्मज्ञस्य विलयं प्रजा गच्छन्ति निग्रहात्।
राजा मूलं त्रिवर्गस्य स्वप्रमत्तोऽनुपालयेत्॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
जो राजा धर्म को नहीं जानता, उसके अत्याचारों के कारण उसकी प्रजा नष्ट हो जाती है। राजा ही धर्म, अर्थ और काम का मूल है। इसलिए उसे बहुत सावधान रहना चाहिए और अपनी प्रजा का सदैव ध्यान रखना चाहिए।
 
The king who does not know Dharma, his subjects get destroyed due to his atrocities. The king is the root of Dharma, Artha and Kama. Therefore, he should be very careful and always take care of his subjects.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)