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mahabharat 12.139.95: बुरे मित्र का स्नेह कभी स्थिर नहीं रह सकता; इसलिए उसके साथ सदा अच्छे सम्बन्ध बनाये रखना असम्भव है। और जहाँ बुरा सम्बन्ध होता है, वहाँ स्वार्थ में भेद होने पर अपमान होने लगता है ॥95॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.95 
कुमित्रे संगतिर्नास्ति नित्यमस्थिरसौहृदे।
अवमान: कुसम्बन्धे भवत्यर्थविपर्यये॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
बुरे मित्र का स्नेह कभी स्थिर नहीं रह सकता; इसलिए उसके साथ सदा अच्छे सम्बन्ध बनाये रखना असम्भव है। और जहाँ बुरा सम्बन्ध होता है, वहाँ स्वार्थ में भेद होने पर अपमान होने लगता है ॥95॥
 
The affection of a bad friend can never remain constant; therefore it is impossible to maintain good relations with him forever. And where there is a bad relationship, when there is a difference in self-interest, insults start taking place. ॥ 95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)