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श्लोक  12.139.88 
नित्यं बुद्धिमतोऽप्यर्थ: स्वल्पकोऽपि विवर्धते।
दाक्ष्येण कुर्वत: कर्म संयमात् प्रतितिष्ठति॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान व्यक्ति के पास यदि थोड़ा भी धन हो तो वह बढ़ता ही रहता है। वह कुशलता से काम करता है और संयम से सम्मान प्राप्त करता है। 88।
 
Even if a wise man has a little wealth, it keeps on increasing. He works skillfully and earns respect through self-restraint. 88.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)