Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.139.87: विद्वान् मनुष्य सर्वत्र सुखी रहता है और सर्वत्र अच्छा दिखता है। उसे कोई नहीं डराता और यदि कोई डरा भी दे तो भी वह भयभीत नहीं होता। 87   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  12.139.87 
सर्वत्र रमते प्राज्ञ: सर्वत्र च विराजते।
न विभीषयते कश्चिद् भीषितो न बिभेति च॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
विद्वान् मनुष्य सर्वत्र सुखी रहता है और सर्वत्र अच्छा दिखता है। उसे कोई नहीं डराता और यदि कोई डरा भी दे तो भी वह भयभीत नहीं होता। 87
 
A learned man lives in happiness everywhere and he looks good everywhere. No one frightens him and even if someone frightens him, he is not afraid. 87
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)