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mahabharat 12.139.86: घर, ताँबा आदि धातुएँ, खेत, स्त्रियाँ और मित्र - ये उपमित्र कहे गए हैं। मनुष्य इन्हें सर्वत्र पा सकता है ॥86॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.86 
निवेशनं च कुप्यं च क्षेत्रं भार्या सुहृज्जन:।
एतान्युपहितान्याहु: सर्वत्र लभते पुमान्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
घर, ताँबा आदि धातुएँ, खेत, स्त्रियाँ और मित्र - ये उपमित्र कहे गए हैं। मनुष्य इन्हें सर्वत्र पा सकता है ॥86॥
 
House, metals like copper, fields, women and friends – these have been described as Upamitras. Man can find them everywhere. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)