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विद्या शौर्यं च दाक्ष्यं च बलं धैर्यं च पञ्चमम्।
मित्राणि सहजान्याहुर्वर्तयन्तीह तैर्बुधा:॥ ८५॥
अनुवाद
विद्या, शौर्य, कौशल, बल और पाँचवाँ धैर्य - ये पाँच मनुष्य के स्वाभाविक मित्र कहे गए हैं। विद्वान पुरुष इन्हीं के द्वारा इस संसार में सब कार्य करते हैं॥ 85॥
Knowledge, bravery, skill, strength and the fifth patience - these five are said to be the natural friends of man. Learned men do all the work in this world only through these.॥ 85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥