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mahabharat 12.139.85: विद्या, शौर्य, कौशल, बल और पाँचवाँ धैर्य - ये पाँच मनुष्य के स्वाभाविक मित्र कहे गए हैं। विद्वान पुरुष इन्हीं के द्वारा इस संसार में सब कार्य करते हैं॥ 85॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.85 
विद्या शौर्यं च दाक्ष्यं च बलं धैर्यं च पञ्चमम्।
मित्राणि सहजान्याहुर्वर्तयन्तीह तैर्बुधा:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
विद्या, शौर्य, कौशल, बल और पाँचवाँ धैर्य - ये पाँच मनुष्य के स्वाभाविक मित्र कहे गए हैं। विद्वान पुरुष इन्हीं के द्वारा इस संसार में सब कार्य करते हैं॥ 85॥
 
Knowledge, bravery, skill, strength and the fifth patience - these five are said to be the natural friends of man. Learned men do all the work in this world only through these.॥ 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)