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mahabharat 12.139.83: जो भी अपने लिए लाभदायक हो, चाहे वह कठोर हो या कोमल, उसे करते रहना चाहिए। जो अपने कर्म को त्याग देता है, वह दरिद्र हो जाता है और सदैव दुर्भाग्य का शिकार बना रहता है। 83.   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.83 
कर्म चात्महितं कार्यं तीक्ष्णं वा यदि वा मृदु।
ग्रस्यतेऽकर्मशीलस्तु सदानर्थैरकिञ्चन:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जो भी अपने लिए लाभदायक हो, चाहे वह कठोर हो या कोमल, उसे करते रहना चाहिए। जो अपने कर्म को त्याग देता है, वह दरिद्र हो जाता है और सदैव दुर्भाग्य का शिकार बना रहता है। 83.
 
Whatever is beneficial for oneself, be it hard or soft, one should keep doing that work. One who abandons his work becomes poor and always remains a victim of misfortunes. 83.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)