Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.139.82: भाग्य और पुरुषार्थ एक दूसरे पर निर्भर हैं, परंतु उदार विचार वाले पुरुष सदैव अच्छे कर्म करते हैं और नपुंसक लोग भाग्य पर निर्भर रहते हैं ॥ 82॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.139.82 
दैवं पुरुषकारश्च स्थितावन्योन्यसंश्रयात्।
उदाराणां तु सत्कर्म दैवं क्लीबा उपासते॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
भाग्य और पुरुषार्थ एक दूसरे पर निर्भर हैं, परंतु उदार विचार वाले पुरुष सदैव अच्छे कर्म करते हैं और नपुंसक लोग भाग्य पर निर्भर रहते हैं ॥ 82॥
 
Destiny and effort depend on each other, but men with generous thoughts always perform good deeds and impotent people depend on destiny. ॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)