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mahabharat 12.139.80: जो मनुष्य प्रतिदिन उत्तम आहार खाता है, चाहे वह कड़वा हो, कसैला हो, स्वादिष्ट हो या मीठा हो, वही आहार उसके लिए अमृत के समान लाभदायक है ॥80॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.80 
यस्तु तिक्तं कषायं वा स्वादु वा मधुरं हितम्।
आहारं कुरुते नित्यं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन उत्तम आहार खाता है, चाहे वह कड़वा हो, कसैला हो, स्वादिष्ट हो या मीठा हो, वही आहार उसके लिए अमृत के समान लाभदायक है ॥80॥
 
One who eats wholesome food every day, be it bitter, astringent, tasty or sweet, that very food is as beneficial to him as nectar. ॥ 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)