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mahabharat 12.139.76: साधक बोला - राजन! यदि किसी व्यक्ति के दोनों पैरों में घाव हो, फिर भी वह उन पैरों से चलता रहे, तो चाहे वह कितनी भी सावधानी से चले, यहाँ दौड़ते समय उन पैरों में पुनः घाव होते रहेंगे।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.76 
पूजन्युवाच
यस्येह व्रणिनौ पादौ पद्‍भ्यां च परिसर्पति।
खन्येते तस्य तौ पादौ सुुगुप्तमिह धावत:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
साधक बोला - राजन! यदि किसी व्यक्ति के दोनों पैरों में घाव हो, फिर भी वह उन पैरों से चलता रहे, तो चाहे वह कितनी भी सावधानी से चले, यहाँ दौड़ते समय उन पैरों में पुनः घाव होते रहेंगे।
 
The worshipper said - King! If a person has wounds on both his feet, still he continues to walk with those feet, no matter how cautiously he walks, those feet will keep getting wounds again while running here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)