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mahabharat 12.139.74: हे राजन! किसी के प्रति अपराध करने के बाद उस पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। जो दूसरों का अहित करके भी उन पर विश्वास करता है, उसे दुःख भोगना पड़ता है।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.74 
सदा न विश्वसेद् राजन् पापं कृत्वेह कस्यचित्।
अपकृत्य परेषां हि विश्वासाद् दु:खमश्नुते॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! किसी के प्रति अपराध करने के बाद उस पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। जो दूसरों का अहित करके भी उन पर विश्वास करता है, उसे दुःख भोगना पड़ता है।
 
O King! One should never trust someone after committing a crime against him. One who trusts others even after doing harm to them has to suffer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)