Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.73: हे मनुष्यों के स्वामी! दुष्ट स्वभाव वाले मनुष्य अपने मन में शत्रुता रखते हैं और बाहर से मीठी-मीठी बातें करके अपने शत्रु को सांत्वना देते हैं। फिर जब अवसर मिलता है, तो उसे उसी प्रकार कुचल देते हैं, जैसे कोई पानी से भरे घड़े को पत्थर पर पटककर टुकड़े-टुकड़े कर देता है। | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! दुष्ट स्वभाव वाले मनुष्य अपने मन में शत्रुता रखते हैं और बाहर से मीठी-मीठी बातें करके अपने शत्रु को सांत्वना देते हैं। फिर जब अवसर मिलता है, तो उसे उसी प्रकार कुचल देते हैं, जैसे कोई पानी से भरे घड़े को पत्थर पर पटककर टुकड़े-टुकड़े कर देता है।
Lord of men! People with evil nature harbor enmity in their hearts and outwardly console their enemy with sweet words. Then, when they get an opportunity, they crush him in the same way as someone breaks a pot full of water into pieces by throwing it on a stone. 73.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥