Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.72: जब किसी परिवार में दुःखदायी शत्रुता उत्पन्न हो जाती है, तो वह शांत नहीं होती। उसे याद दिलाने वाले लोग तो रहते ही हैं, अतः जब तक परिवार में एक भी व्यक्ति जीवित रहता है, तब तक वह शत्रुता समाप्त नहीं होती ॥ 72॥ | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि वैराणि शाम्यन्ति कुले दु:खगतानि च।
आख्यातारश्च विद्यन्ते कुले वै ध्रियते पुमान्॥ ७२॥
अनुवाद
जब किसी परिवार में दुःखदायी शत्रुता उत्पन्न हो जाती है, तो वह शांत नहीं होती। उसे याद दिलाने वाले लोग तो रहते ही हैं, अतः जब तक परिवार में एक भी व्यक्ति जीवित रहता है, तब तक वह शत्रुता समाप्त नहीं होती ॥ 72॥
When a painful enmity develops in a family, it does not calm down. There are always people who remind people of it, so as long as even one person in the family is alive, that enmity does not end. ॥ 72॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥