Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.69: इस प्रकार यदि कोई प्राणघातक शत्रु बनकर भी किसी दूसरे से प्रेम करना चाहे तो उसका प्रेम उसी प्रकार असम्भव है जैसे मिट्टी का घड़ा एक बार टूट जाने पर फिर नहीं जुड़ता ॥69॥ | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार यदि कोई प्राणघातक शत्रु बनकर भी किसी दूसरे से प्रेम करना चाहे तो उसका प्रेम उसी प्रकार असम्भव है जैसे मिट्टी का घड़ा एक बार टूट जाने पर फिर नहीं जुड़ता ॥69॥
In this manner, if one wishes to love another after having become a mortal enemy, his love is as impossible as an earthen pot, once broken, cannot be repaired. ॥ 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥