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mahabharat 12.139.66: जो दुःखी और शोकग्रस्त है तथा जो अपने और दूसरों के दुःख का सार जानता है, वह ऐसी बात कैसे कह सकता है ॥66॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.66 
यस्तु शोचति दु:खार्त: स कथं वक्तुमुत्सहेत्।
रसज्ञ: सर्वदु:खस्य यथाऽऽत्मनि तथा परे॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जो दुःखी और शोकग्रस्त है तथा जो अपने और दूसरों के दुःख का सार जानता है, वह ऐसी बात कैसे कह सकता है ॥66॥
 
How can one who is suffering and mourning and who knows the essence of the suffering of both his own and others, say such a thing? ॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)