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mahabharat 12.139.64: हत्या और बंदी बनाना भी सभी को दुःख पहुँचाता है। स्त्री के कारण दुःख होता है और स्वाभाविक रूप से भी होता है। और यदि पुत्र नष्ट हो जाए या दुष्ट निकले, तो लोग उससे सदैव दुःख पाते हैं। 64.   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.64 
वधबन्धकृतं दु:खं स्त्रीकृतं सहजं तथा।
दु:खं सुतेन सततं जनान् विपरिवर्तते॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
हत्या और बंदी बनाना भी सभी को दुःख पहुँचाता है। स्त्री के कारण दुःख होता है और स्वाभाविक रूप से भी होता है। और यदि पुत्र नष्ट हो जाए या दुष्ट निकले, तो लोग उससे सदैव दुःख पाते हैं। 64.
 
Killing and captivity also cause sorrow to everyone. Sorrow is caused by a woman and naturally also. And if a son is destroyed or turns out to be evil, then people always receive sorrow from him. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)