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mahabharat 12.139.63: महाराज ब्रह्मदत्त! दुःख अनेक प्रकार के होते हैं। बुढ़ापा दुःख है, धन का नाश दुःख है, अप्रिय लोगों के साथ रहना दुःख है और प्रियजनों से वियोग दुःख है। 63॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.63 
दु:खं जरा ब्रह्मदत्त दु:खमर्थविपर्यय:।
दु:खं चानिष्टसंवासो दु:खमिष्टवियोजनम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महाराज ब्रह्मदत्त! दुःख अनेक प्रकार के होते हैं। बुढ़ापा दुःख है, धन का नाश दुःख है, अप्रिय लोगों के साथ रहना दुःख है और प्रियजनों से वियोग दुःख है। 63॥
 
Maharaj Brahmadutt! There are many forms of sorrow. Old age is sorrow, loss of wealth is sorrow, living with unpleasant people is sorrow and separation from loved ones is sorrow. 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)