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mahabharat 12.139.61: इस मारण और बंधन के भय से ही मोक्ष की अभिलाषा रखने वाले मनुष्य शास्त्रों का सहारा लेते हैं, क्योंकि वेदों के ज्ञाता कहते हैं कि जन्म-मरण का दुःख असह्य है ॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.61 
वधबन्धभयादेते मोक्षतन्त्रमुपाश्रिता:।
जनीमरणजं दु:खं प्राहुर्वेदविदो जना:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
इस मारण और बंधन के भय से ही मोक्ष की अभिलाषा रखने वाले मनुष्य शास्त्रों का सहारा लेते हैं, क्योंकि वेदों के ज्ञाता कहते हैं कि जन्म-मरण का दुःख असह्य है ॥ 61॥
 
It is because of the fear of this killing and bondage that those who are yearning for liberation take recourse to the scriptures, because the knowers of the Vedas say that the pain of birth and death is unbearable. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)