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mahabharat 12.139.53: हे भक्त! मैं तुम्हें किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाऊँगा। तुम अपनी इच्छानुसार यहाँ प्रेमपूर्वक निवास करो। मैंने तुम्हारे किए को क्षमा कर दिया है और तुम भी मेरे किए को क्षमा करो। ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.53 
एवं वसेह सस्नेहा यथाकाममहिंसिता।
यत् कृतं तत् तु मे क्षान्तं त्वं च वै क्षम पूजनि॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे भक्त! मैं तुम्हें किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाऊँगा। तुम अपनी इच्छानुसार यहाँ प्रेमपूर्वक निवास करो। मैंने तुम्हारे किए को क्षमा कर दिया है और तुम भी मेरे किए को क्षमा करो। ॥53॥
 
O worshipper! I will not harm you in any way. You may reside here lovingly according to your wish. I have forgiven you for whatever you have done and you may also forgive me for whatever I have done. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)