Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.52: शुभ! न तो तुम और न ही मैं एक-दूसरे के प्रति किए गए अपराधों का वास्तविक कारण हो। काल ही सभी देहधारियों के सुख-दुःख को सदैव ग्रहण या उत्पन्न करता है ॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहं प्रमाणं नैव त्वमन्योन्यं कारणं शुभे।
कालो नित्यमुपादत्ते सुखं दु:खं च देहिनाम्॥ ५२॥
अनुवाद
शुभ! न तो तुम और न ही मैं एक-दूसरे के प्रति किए गए अपराधों का वास्तविक कारण हो। काल ही सभी देहधारियों के सुख-दुःख को सदैव ग्रहण या उत्पन्न करता है ॥ 52॥
Shubh! Neither you nor I are the real cause of the offences committed against one another. Time alone always receives or produces the happiness and sorrows of all embodied beings. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥