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mahabharat 12.139.50: जन्म और मृत्यु - ये दोनों क्रियाएँ समान रूप से होती रहती हैं। और काल ही इन्हें कराता है। इसीलिए प्राणी जीवित नहीं रह सकता ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.50 
तुल्यं चोभे प्रवर्तेते मरणं जन्म चैव ह।
कार्यते चैव कालेन तन्निमित्तं न जीवति॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जन्म और मृत्यु - ये दोनों क्रियाएँ समान रूप से होती रहती हैं। और काल ही इन्हें कराता है। इसीलिए प्राणी जीवित नहीं रह सकता ॥50॥
 
Birth and death- both these actions keep happening in a similar fashion. And it is time that makes them happen. That is why a creature cannot survive. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)