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mahabharat 12.139.48: अब तक न तो मैंने तुम्हें कोई हानि पहुंचाई थी और न तुमने मुझे कोई हानि पहुंचाई थी; इसीलिए मैं तुम्हारे महल में रहता था, परन्तु अब मैं तुम पर विश्वास नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.48 
नैवापकारे कस्मिंश्चिदहं त्वयि तथा भवान्।
उषितास्मि गृहेऽहं ते नेदानीं विश्वसाम्यहम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
अब तक न तो मैंने तुम्हें कोई हानि पहुंचाई थी और न तुमने मुझे कोई हानि पहुंचाई थी; इसीलिए मैं तुम्हारे महल में रहता था, परन्तु अब मैं तुम पर विश्वास नहीं कर सकता।
 
So far I had neither done you any harm nor you had caused me any harm; that is why I lived in your palace, but now I cannot trust you. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)