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नैवापकारे कस्मिंश्चिदहं त्वयि तथा भवान्।
उषितास्मि गृहेऽहं ते नेदानीं विश्वसाम्यहम्॥ ४८॥
अनुवाद
अब तक न तो मैंने तुम्हें कोई हानि पहुंचाई थी और न तुमने मुझे कोई हानि पहुंचाई थी; इसीलिए मैं तुम्हारे महल में रहता था, परन्तु अब मैं तुम पर विश्वास नहीं कर सकता।
So far I had neither done you any harm nor you had caused me any harm; that is why I lived in your palace, but now I cannot trust you. 48.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥