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mahabharat 12.139.46: हे मनुष्यों के स्वामी! शत्रुता की प्रज्वलित अग्नि एक पक्ष को जलाए बिना नहीं बुझती और उससे उत्पन्न अपराध एक पक्ष को मारे बिना शांत नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.46 
न हि वैराग्निरुद्भूत: कर्म चाप्यपराधजम्।
शाम्यत्यदग्ध्वा नृपते विना ह्येकतरक्षयात्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! शत्रुता की प्रज्वलित अग्नि एक पक्ष को जलाए बिना नहीं बुझती और उससे उत्पन्न अपराध एक पक्ष को मारे बिना शांत नहीं होता।
 
O Lord of men! The blazing fire of enmity cannot be extinguished without burning one party and the crime caused by it cannot be appeased without killing one party.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)