Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.45: राजा! जिस प्रकार समुद्र में प्रचण्ड अग्नि किसी भी उपाय से शान्त नहीं होती, उसी प्रकार क्रोध की अग्नि न तो धन से, न कठोरता दिखाने से, न मीठे वचनों से समझाने या समझाने से, न शास्त्रों के ज्ञान से शान्त होती है। | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वित्तेन न पारुष्यैर्न सान्त्वेन न च श्रुतै:।
कोपाग्नि: शाम्यते राजंस्तोयाग्निरिव सागरे॥ ४५॥
अनुवाद
राजा! जिस प्रकार समुद्र में प्रचण्ड अग्नि किसी भी उपाय से शान्त नहीं होती, उसी प्रकार क्रोध की अग्नि न तो धन से, न कठोरता दिखाने से, न मीठे वचनों से समझाने या समझाने से, न शास्त्रों के ज्ञान से शान्त होती है।
King! Just as a great fire in the ocean cannot be pacified by any means, similarly the fire of anger cannot be pacified by money, nor by showing harshness, nor by explaining or explaining with sweet words, nor by the knowledge of scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥