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श्लोक  12.139.42 
पूजन्युवाच
वैरं पञ्चसमुत्थानं तच्च बुध्यन्ति पण्डिता:।
स्त्रीकृतं वास्तुजं वाग्जं ससापत्नापराधजम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
पूजनी बोली, "हे राजन! शत्रुता पाँच कारणों से होती है; विद्वान पुरुष इसे भली-भाँति जानते हैं। 1. स्त्री के लिए, 2. मकान और भूमि के लिए, 3. कटु वचनों के कारण, 4. जाति-द्वेष के कारण और 5. कुछ समय पूर्व किए गए अपराध के कारण।
 
Poojni said, "O King! Enmity happens due to five reasons; learned men know this very well. 1. For a woman, 2. For a house and land, 3. Due to harsh words, 4. Due to caste hatred and 5. Due to a crime committed sometime ago.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)