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mahabharat 12.139.40: ब्रह्मदत्त ने कहा, "पूजानी! यदि जीवन का नाश करने वाले लोग एक साथ रहने लगें, तो उनमें परस्पर स्नेह और विश्वास उत्पन्न हो जाता है, जैसे कुत्ता शूद्र के साथ रहने पर शूद्र के प्रति स्नेह और विश्वास उत्पन्न कर लेता है।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.40 
ब्रह्मदत्त उवाच
संवासाज्जायते स्नेहो जीवितान्तकरेष्वपि।
अन्योन्यस्य च विश्वास: श्वपचेन शुनो यथा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मदत्त ने कहा, "पूजानी! यदि जीवन का नाश करने वाले लोग एक साथ रहने लगें, तो उनमें परस्पर स्नेह और विश्वास उत्पन्न हो जाता है, जैसे कुत्ता शूद्र के साथ रहने पर शूद्र के प्रति स्नेह और विश्वास उत्पन्न कर लेता है।
 
Brahmadatta said, "Pujani! If those who destroy lives start living together, they develop mutual affection and trust in each other, just like a dog develops affection and trust in a Shudra when it lives with a Shudra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)