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श्लोक  12.139.35 
ब्रह्मदत्त उवाच
य: कृते प्रतिकुर्याद् वै न स तत्रापराध्नुयात् ।
अनृणस्तेन भवति वस पूजनि मा गम:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मदत्त ने कहा - पुजानि! यदि कोई व्यक्ति अपराध करके बदले में कुछ करता है, तो वह कोई अपराध नहीं करता - वह अपराधी नहीं माना जाता। ऐसा करने से पूर्व अपराधी अपने ऋण से मुक्त हो जाता है; अतः आप यहीं रहें। कहीं न जाएँ। 35।
 
Brahmadatta said - Pujani! If a person commits a crime and does something in return, he does not commit any crime - he is not considered a criminal. By doing this, the previous criminal becomes free from his debt; therefore, you stay here. Do not go anywhere. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)