Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.35: ब्रह्मदत्त ने कहा - पुजानि! यदि कोई व्यक्ति अपराध करके बदले में कुछ करता है, तो वह कोई अपराध नहीं करता - वह अपराधी नहीं माना जाता। ऐसा करने से पूर्व अपराधी अपने ऋण से मुक्त हो जाता है; अतः आप यहीं रहें। कहीं न जाएँ। 35। | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मदत्त उवाच
य: कृते प्रतिकुर्याद् वै न स तत्रापराध्नुयात् ।
अनृणस्तेन भवति वस पूजनि मा गम:॥ ३५॥
अनुवाद
ब्रह्मदत्त ने कहा - पुजानि! यदि कोई व्यक्ति अपराध करके बदले में कुछ करता है, तो वह कोई अपराध नहीं करता - वह अपराधी नहीं माना जाता। ऐसा करने से पूर्व अपराधी अपने ऋण से मुक्त हो जाता है; अतः आप यहीं रहें। कहीं न जाएँ। 35।
Brahmadatta said - Pujani! If a person commits a crime and does something in return, he does not commit any crime - he is not considered a criminal. By doing this, the previous criminal becomes free from his debt; therefore, you stay here. Do not go anywhere. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥