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mahabharat 12.139.33: जिस स्थान पर पहले सम्मान मिलता था, यदि बाद में उसका अपमान होने लगे, तो प्रत्येक शक्तिशाली मनुष्य को उस स्थान को त्याग देना चाहिए, भले ही उसे पुनः सम्मान मिल जाए ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.33 
पूर्वं सम्मानना यत्र पश्चाच्चैव विमानना।
जह्यात् तत् सत्त्ववान्स्थानं शत्रो: सम्मानितोऽपि सन्॥३३॥
 
 
अनुवाद
जिस स्थान पर पहले सम्मान मिलता था, यदि बाद में उसका अपमान होने लगे, तो प्रत्येक शक्तिशाली मनुष्य को उस स्थान को त्याग देना चाहिए, भले ही उसे पुनः सम्मान मिल जाए ॥33॥
 
If a place where one received respect earlier starts being insulted later, every powerful man should abandon that place even if he is respected again. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)