Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.32: दूसरों का अहित करने वाले मनुष्य को यदि दान और आदर से भी पूजा जाए, तो भी उसका मन आश्वस्त नहीं होता। अपने द्वारा किए गए अधर्म कर्म दुर्बल लोगों को भयभीत करते रहते हैं ॥32॥ | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूसरों का अहित करने वाले मनुष्य को यदि दान और आदर से भी पूजा जाए, तो भी उसका मन आश्वस्त नहीं होता। अपने द्वारा किए गए अधर्म कर्म दुर्बल लोगों को भयभीत करते रहते हैं ॥32॥
Even if a person who has harmed others is worshipped with charity and respect, his mind is not confident. The wrongful deeds committed by oneself keep frightening the weak people. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥