Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.139.29: जो विश्वासयोग्य न हो, उस पर विश्वास मत करो। जो विश्वासयोग्य हो, उस पर भी अति विश्वास मत करो, क्योंकि विश्वास से उत्पन्न भय विश्वास करने वाले को नष्ट कर देता है। तुम दूसरों पर विश्वास तो उत्पन्न कर सकते हो, परन्तु स्वयं दूसरों पर विश्वास मत करो।॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न विश्वसेदविश्वस्ते विश्वस्ते नातिविश्वसेत्।
विश्वासाद् भयमुत्पन्नमपि मूलं निकृन्तति।
कामं विश्वासयेदन्यान् परेषां च न विश्वसेत्॥ २९॥
अनुवाद
जो विश्वासयोग्य न हो, उस पर विश्वास मत करो। जो विश्वासयोग्य हो, उस पर भी अति विश्वास मत करो, क्योंकि विश्वास से उत्पन्न भय विश्वास करने वाले को नष्ट कर देता है। तुम दूसरों पर विश्वास तो उत्पन्न कर सकते हो, परन्तु स्वयं दूसरों पर विश्वास मत करो।॥29॥
Do not trust someone who is not trustworthy. Do not trust too much even someone who is trustworthy because the fear that arises from trust destroys the person who trusts. You may generate trust in others but do not trust others yourself.॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥