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mahabharat 12.139.15: अपने पुत्र को ऐसी दयनीय अवस्था में देखकर पूजनी के मुख से आँसू बहने लगे और वह शोक से भर गई और रोते हुए इस प्रकार कहने लगी-॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.15 
बाष्पपूर्णमुखी दीना दृष्ट्वा तं रुदती सुतम्।
पूजनी दु:खसंतप्ता रुदती वाक्यमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र को ऐसी दयनीय अवस्था में देखकर पूजनी के मुख से आँसू बहने लगे और वह शोक से भर गई और रोते हुए इस प्रकार कहने लगी-॥15॥
 
Seeing her son in such a pitiable state, tears started flowing from Poojani's face and she was filled with grief and started crying and saying this -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)