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mahabharat 12.139.11-12: उस फल को खाकर राजकुमार बहुत स्वस्थ हो गया। एक दिन धाय राजकुमार को गोद में लिए घूम रही थी। राजकुमार तो बच्चा ही था, इसलिए बचपना दिखाते हुए वह उस चिड़िया के बच्चे को देखने आया और बड़े चाव से उसके साथ खेलने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  12.139.11-12 
ततोऽगच्छत् परां वृद्धिं राजपुत्र: फलाशनात् ।
तत: स धात्र्या कक्षेण उह्यमानो नृपात्मज:॥ ११॥
ददर्श तं पक्षिसुतं बाल्यादागत्य बालक:।
ततो बाल्याच्च यत्नेन तेनाक्रीडत पक्षिणा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस फल को खाकर राजकुमार बहुत स्वस्थ हो गया। एक दिन धाय राजकुमार को गोद में लिए घूम रही थी। राजकुमार तो बच्चा ही था, इसलिए बचपना दिखाते हुए वह उस चिड़िया के बच्चे को देखने आया और बड़े चाव से उसके साथ खेलने लगा।
 
The prince grew very healthy by eating that fruit. One day the nurse was walking around carrying the prince in her lap. He was a child after all, so being childish he came and saw the baby bird and started playing with it with great interest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)