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mahabharat 12.139.109: जिस राजा की प्रजा सदैव करों के बोझ से दबी रहती है, सदैव चिंतित रहती है तथा विभिन्न प्रकार की विपत्तियों से पीड़ित रहती है, वह राजा पराजित होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.109 
नित्योद्विग्ना: प्रजा यस्य करभारप्रपीडिता:।
अनर्थैर्विप्रलुप्यन्ते स गच्छति पराभवम्॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा की प्रजा सदैव करों के बोझ से दबी रहती है, सदैव चिंतित रहती है तथा विभिन्न प्रकार की विपत्तियों से पीड़ित रहती है, वह राजा पराजित होता है।
 
A king whose subjects are always burdened with taxes and are always worried and are tormented by various kinds of calamities, is defeated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)