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mahabharat 12.139.108: जो राजा नगर और ग्राम के लोगों का आदर करना जानता है, वह इस लोक और परलोक में सर्वत्र सुख देखता है ॥108॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.108 
स्वयं समुपजानन् हि पौरजानपदार्चनम्।
स सुखं प्रेक्षते राजा इह लोके परत्र च॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
जो राजा नगर और ग्राम के लोगों का आदर करना जानता है, वह इस लोक और परलोक में सर्वत्र सुख देखता है ॥108॥
 
The king who knows how to respect the people of the city and villages sees happiness everywhere in this world and the next. ॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)