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यस्तु रञ्जयते राजा पौरजानपदान् गुणै:।
न तस्य भ्रमते राज्यं स्वयं धर्मानुपालनात्॥ १०७॥
अनुवाद
जो राजा अपने गुणों से अपने नगर और जनपद की प्रजा को प्रसन्न रखता है, उसका राज्य कभी अस्थिर नहीं होता, क्योंकि वह स्वयं निरन्तर धर्म का पालन करता रहता है ॥107॥
The king who keeps the people of his city and district happy with his virtues, his kingdom never becomes unstable because he himself keeps following the Dharma (righteousness) continuously. ॥ 107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥