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mahabharat 12.139.101: जो पापी राजा धन के लोभ से प्रजा को अभयदान देता है और फिर स्वयं उसका पालन नहीं करता, वह सम्पूर्ण जगत् के पापों का संचय करके नरक में जाता है ॥101॥   |   mahabharat अध्याय 12.139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.139.101 
दत्त्वाभयं य: स्वयमेव राजा
न तत् प्रमाणं कुरुतेऽर्थलोभात्।
स सर्वलोकादुपलभ्य पापं
सोऽधर्मबुद्धिर्निरयं प्रयाति॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
जो पापी राजा धन के लोभ से प्रजा को अभयदान देता है और फिर स्वयं उसका पालन नहीं करता, वह सम्पूर्ण जगत् के पापों का संचय करके नरक में जाता है ॥101॥
 
A sinful king who, out of greed for money, gives protection to his subjects and then does not follow it himself, accumulates the sins of the entire world and goes to hell. ॥101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)