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mahabharat 12.138.98: उस समय, जैसे ही तुम मुक्त होगे, जो पहला वृक्ष मिलेगा, उसी पर चढ़ जाओगे। प्राण बचाने के अतिरिक्त तुम्हें और कुछ आवश्यक नहीं लगेगा॥ 98॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.98 
तस्मिन् काले प्रमुक्तस्त्वं तरुमेवाधिरोक्ष्यसे।
न हि ते जीवितादन्यत् किंचित् कृत्यं भविष्यति॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
उस समय, जैसे ही तुम मुक्त होगे, जो पहला वृक्ष मिलेगा, उसी पर चढ़ जाओगे। प्राण बचाने के अतिरिक्त तुम्हें और कुछ आवश्यक नहीं लगेगा॥ 98॥
 
‘At that time, as soon as you are free, you will climb the first tree you find. Nothing else will seem necessary to you except saving your life.॥ 98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)