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mahabharat 12.138.96: "यदि तुम असमय छूट गए, तो मुझे तुमसे भय हो सकता है, इसलिए मेरे मित्र! थोड़ी देर और रुको; इतनी जल्दी क्यों हो ?॥ 96॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  12.138.96 
अकाले विप्रमुक्तान्मे त्वत्त एव भयं भवेत् ।
तस्मात् कालं प्रतीक्षस्व किमिति त्वरसे सखे॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
"यदि तुम असमय छूट गए, तो मुझे तुमसे भय हो सकता है, इसलिए मेरे मित्र! थोड़ी देर और रुको; इतनी जल्दी क्यों हो ?॥ 96॥
 
"If you are released untimely, I might be afraid of you, so my friend! Wait a little longer; why are you in such a hurry?॥ 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)