Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.95: अनुचित समय पर आरंभ किया गया कार्य करने वाले के लिए लाभदायक नहीं होता, परंतु यदि वही कार्य उचित समय पर आरंभ किया जाए तो वह महान धन प्राप्ति का साधन बन जाता है ॥95॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकाले कृत्यमारब्धं कर्तुर्नार्थाय कल्पते।
तदेव काल आरब्धं महतेऽर्थाय कल्पते॥ ९५॥
अनुवाद
अनुचित समय पर आरंभ किया गया कार्य करने वाले के लिए लाभदायक नहीं होता, परंतु यदि वही कार्य उचित समय पर आरंभ किया जाए तो वह महान धन प्राप्ति का साधन बन जाता है ॥95॥
'Work started at an inappropriate time is not beneficial for the person doing it but if the same work is started at the right time it becomes a means of great wealth. ॥ 95॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥