Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.138.92: सौम्य! तुम शीघ्रता क्यों नहीं करते? क्या तुम्हारा काम पूरा हो गया है, इसलिए तुम मुझे अनदेखा कर रहे हो? शत्रुसूदन! देखो, चाण्डाल अभी आता ही होगा। उसके आने से पहले ही मेरे बन्धन काट दो॥॥92॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  12.138.92 
किं सौम्य नातित्वरसे किं कृतार्थोऽवमन्यसे।
छिन्धि पाशानमित्रघ्न पुरा श्वपच एति च॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! तुम शीघ्रता क्यों नहीं करते? क्या तुम्हारा काम पूरा हो गया है, इसलिए तुम मुझे अनदेखा कर रहे हो? शत्रुसूदन! देखो, चाण्डाल अभी आता ही होगा। उसके आने से पहले ही मेरे बन्धन काट दो॥॥92॥
 
'Soumya! Why don't you hurry up? Is your work done, that's why you ignore me? Shatrusudan! Look, the Chandala must be coming now. Cut my bonds before he comes.'॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)