श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 90-91
 
 
श्लोक  12.138.90-91 
अथ बन्धपरिक्लिष्टो मार्जारो वीक्ष्य मूषिकम्।
छिन्दन्तं वै तदा पाशानत्वरन्तं त्वरान्वित:॥ ९०॥
तमत्वरन्तं पलितं पाशानां छेदने तथा।
संचोदयितुमारेभे मार्जारो मूषिकं तदा॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
बिल्ली उस बंधन से तंग आ गई थी। उसने देखा कि चूहा जाल तो काट रहा है, परन्तु उसमें कोई फुर्ती नहीं दिखा रहा है। तब वह अधीर हो गई और पलित नामक चूहे से बोली, जो जाल काटने में कोई जल्दी नहीं दिखा रहा था -॥90-91॥
 
The cat was fed up of that bond. He saw that the mouse was cutting the net but was not showing any agility in doing so. Then he became impatient and said to the mouse named Palit who was not in a hurry to cut the net -॥ 90-91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)