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mahabharat 12.138.89: हे मनुष्यों के स्वामी! चूहा देश-काल की गति को भली-भाँति जानता था; इसलिए वह बिल्ली के शरीर में छिपकर चाण्डाल के आने की प्रतीक्षा करने लगा और धीरे-धीरे जाल काटने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  12.138.89 
लीन: स तस्य गात्रेषु पलितो देशकालवित्।
चिच्छेद पाशान् नृपते कालापेक्षी शनै: शनै:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! चूहा देश-काल की गति को भली-भाँति जानता था; इसलिए वह बिल्ली के शरीर में छिपकर चाण्डाल के आने की प्रतीक्षा करने लगा और धीरे-धीरे जाल काटने लगा।
 
O lord of men! The mouse knew the movement of time and space very well; therefore, hiding in the cat's body, it waited for the arrival of the Chandala and slowly started cutting the net. 89
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)