श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.138.84 
एवमाश्वासितो विद्वान् मार्जारेण स मूषिक:।
मार्जारोरसि विस्रब्ध: सुष्वाप पितृमातृवत्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
जब बिल्ली ने विद्वान चूहे को उपरोक्त प्रकार से आश्वस्त किया, तो चूहा निडर होकर बिल्ली की छाती पर सो गया, मानो वह माता-पिता की गोद हो। 84
 
When the cat assured the learned mouse in the above manner, the mouse slept fearlessly on the cat's chest as if it were a parent's lap. 84
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)