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mahabharat 12.138.83: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रकार चूहे ने बिल्ली को अपनी बात मनवा ली और स्वयं भी उस पर विश्वास करके उस दोषी शत्रु की गोद में जाकर बैठ गया।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  12.138.83 
भीष्म उवाच
ग्राहयित्वा तु तं स्वार्थं मार्जारं मूषिकस्तथा।
प्रविवेश तु विश्रभ्य क्रोडमस्य कृतागस:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रकार चूहे ने बिल्ली को अपनी बात मनवा ली और स्वयं भी उस पर विश्वास करके उस दोषी शत्रु की गोद में जाकर बैठ गया।
 
Bhishma says - Yudhishthir! In this way, the mouse made the cat agree to its proposal and believed it himself and went and sat in the lap of that guilty enemy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)