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mahabharat 12.138.82: कोई व्यक्ति किसी दूसरे के उपकार का कितना ही बदला क्यों न चुकाए, वह उपकार करने वाले पहले व्यक्ति के बराबर नहीं होता; क्योंकि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के उपकार का बदला चुकाता है; परन्तु दूसरे व्यक्ति ने उसका अकारण ही उपकार किया है।॥82॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.138.82 
प्रत्युपकुर्वन् बह्वपि न भाति
पूर्वोपकारिणा तुल्य:।
एक: करोति हि कृते
निष्कारणमेव कुरुतेऽन्य:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
कोई व्यक्ति किसी दूसरे के उपकार का कितना ही बदला क्यों न चुकाए, वह उपकार करने वाले पहले व्यक्ति के बराबर नहीं होता; क्योंकि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के उपकार का बदला चुकाता है; परन्तु दूसरे व्यक्ति ने उसका अकारण ही उपकार किया है।॥82॥
 
'No matter how much a person repays the favors of another, he is not equal to the first one who did the favor; because one person repays the favor of another person; but the other person has done good to him without any reason.'॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)