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mahabharat 12.138.80: इस कष्ट से मुक्त होकर मैं अपने समस्त बन्धु-बान्धवों सहित आपके लिए समस्त सुखदायी एवं हितकारी कर्म करता रहूँगा॥ 80॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  12.138.80 
अस्मात् तु संकटान्मुक्त: समित्रगणबान्धव:।
सर्वकार्याणि कर्ताहं प्रियाणि च हितानि च॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
इस कष्ट से मुक्त होकर मैं अपने समस्त बन्धु-बान्धवों सहित आपके लिए समस्त सुखदायी एवं हितकारी कर्म करता रहूँगा॥ 80॥
 
'Once I am free from this trouble, I, along with all my friends and relatives, shall continue to do all the pleasant and beneficial deeds for you.॥ 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)