श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.138.79 
यद् यदेवंगतेनाद्य शक्यं कर्तुं मया तव।
तदाज्ञापय कर्तास्मि संधिरेवास्तु नौ सखे॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
मित्र ! इस अवस्था में मुझ सेवक से जो भी कार्य हो सके, उसके लिए मुझे आज्ञा दीजिए, मैं अवश्य करूँगा । हम दोनों में संधि हो जानी चाहिए ॥ 79॥
 
'Friend! Whatever work of yours can be done by me, your servant in this condition, give me orders for that, I will certainly do it. There should be a treaty between us.॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)