Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.138.78: भैया! शीघ्र आओ! तुम्हारा कल्याण हो। तुम हमारे प्राणों के समान प्रिय मित्र हो। विद्वान्! इस समय तुम्हारी कृपा से ही मुझे जीवन मिल सकेगा। 78।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  12.138.78 
शीघ्रमागच्छ भद्रं ते त्वं मे प्राणसम: सखा।
तव प्राज्ञ प्रसादाद्धि प्राय: प्राप्स्यामि जीवितम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
भैया! शीघ्र आओ! तुम्हारा कल्याण हो। तुम हमारे प्राणों के समान प्रिय मित्र हो। विद्वान्! इस समय तुम्हारी कृपा से ही मुझे जीवन मिल सकेगा। 78।
 
'Brother! Come quickly! May you be blessed. You are a friend as dear to us as our life. Scholar! At this time I will be able to get life only by your grace. 78.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)