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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 77
श्लोक
12.138.77
तं सम्पूज्याथ पलितं मार्जार: सौहृदे स्थित:।
स विचिन्त्याब्रवीद् धीर: प्रीतस्त्वरित एव च॥ ७७॥
अनुवाद
इस प्रकार पलीताकी स्तुति और पूजा करके सम्यक्त्वमें स्थित हुए बुद्धिमान मार्जारने भलीभाँति विचार करके तुरन्त प्रसन्नतापूर्वक कहा-॥77॥
Thus, by praising and worshiping Palita, the wise Marjar, who was established in harmony, after thinking carefully, immediately said happily -॥ 77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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